Web Series Review: कॉम्पिटिशन का हर काला और सफेद दिखाती टीवीएफ की 'कोटा फैक्ट्री'



डिजिटल रिव्यू: कोटा फैक्ट्री (वेब सीरीज)

कलाकार: मयूर मोरे, जितेंद्र कुमार, दीपक सिमवाल आदि

निर्देशक: राघव सुब्बू

यूट्यूब चैनल: द वाइरल फीवर


द वाइरल फीवर (टीवीएफ) ने भारत में वीडियो कंटेंट क्रिएटर्स में शुरुआती दौर से ही अपनी अलग जगह बना रखी है। इसके साथ के कल्चर मशीन जैसे तमाम वीडियो क्रिएटर्स जब ज्यादा से ज्यादा कंटेंट बनाकर कामयाब होने की दौड़ में लगे थे, वाइरल फीवर ने कछुए की रफ्तार से चलते हुए रेस जीतने की रणनीति पर काम जारी रखा। 


टीवीएफ का अपना एपीके भी है और इस पर भी इसके वीडियोज देखे जा सकते हैं लेकिन कंपनी ने अपना कंटेंट यूट्यूब पर भी अपलोड करना जारी रखा है। करीब 56 लाख सब्सक्राइबर्स वाले टीवीएफ के यूट्यूब चैनल पर इन दिनों एक नई वेब सीरीज चल रही है कोटा फैक्ट्री। इसका तीसरा एपीसोड मंगलवार को अपलोड हुआ और चौबीस घंटे के भीतर करीब 30 मिनट की अवधि वाले इस एपोसीड को 22 लाख लोग देख चुके हैं और ये लगातार यूट्यूब पर ट्रेंड भी कर रहा है।


वेब सीरीज कोटा फैक्ट्री को ब्लैक एंड व्हाइट में रिलीज करने का टीवीएफ का आइडिया भी कमाल का है। मनोरंजन जगत जब स्पेशल इफेक्ट्स के एवेंजर्स दौर में पहुंच चुका है। एक जमीन से जुड़ी कहानी को ब्लैक एंड व्हाइट में पेश करना इस सीरीज का पहला हुकर प्वाइंट है।  


सीरीज की कहानी राजस्थान के शहर कोटा पहुंचने वाले छात्रों की उन मनोभावनाओं को सामने लाने की कोशिश करती है, जिससे अक्सर इन छात्रों के अभिभावक भी अनजान रहते हैं। पेट काटकर फीस भरने वाले अपने माता पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने के मानसिक दबाव में रहते इन छात्रों पर दूसरा दबाव अपने ही साथ के दूसरे छात्रों का भी रहता है। दुनिया बदल चुकी होती है। सब कुछ वैसा ही नहीं होता जैसा सोचकर ये छात्र घर से यहां आते हैं। ये फैक्ट्री है, जिसमें एक तरफ से छात्र डाला जाता है, दूसरी तरफ से इंजीनियर निकल ही आएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं। सीरीज में दम है और इसकी तमाम कड़ियां अभी रिलीज होनी शेष हैं।